शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

कमबख्त ये आंसू

(हर कोई मुझसे कहता कि मैं बहुत कमजोर हूं। दिल को दुखाने वाली हर छोटी छोटी बातों को लेकर रो पड़ती हूं। मेरे दिल के करीब रहनेवाले सभी यही कहते कि मैं बेवकूफ हूं जो हर किसी के लिए आंसू बहाती हूं। उनका कहना है कि मुझे उनके लिए आंसू बहाना चाहिए जो मेरे अपने हों । लेकिन मैं ये कैसे साबित करुं कि चाहे कोई वो मेरे अपने हों या पराए जब भी मेरा दिल दुखता है तो आंसू अपने आप झरने लगते हैं जिनको चाहकर भी मैं रोक नहीं पाती।)

कौन कहता है कि रोना हमें पसंद है
हां हमें रोना पसंद है, पर ये आंसू नहीं
लेकिन कमबख्त नालायक आंसू
हर छोटी छोटी बातों का संदेशा ले आती
मेरे मासूम से चेहरे को और भी दर्द दे जाती
ये बेमतलबी आंसू हर जगह मुझे कमजोर बनाते हैं
लोगों को बोलने का मौका मिल जाता
रोनेवाली बात ही नहीं फिर तुम रोती क्यों हो
अब मैं हर किसी को कैसे समझाऊं
दर्द देनेवाली हर छोटी बात
मेरे लिए एक बड़ी बात है
जो मेरे जेहन से होकर दिल को छूती है
और दुख के दरिया में आंसूओं का सागर
मेरे चेहरे पर आ मिलता है......

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

समझना अभी भी बाकी है....

ऐसा लगता है मुझे
समझ न सके हैं दुनिया को अबतक
क्योंकि हंसते हंसते रोने लगते हैं
तो कभी रोते रोते हंस पड़ते

नहीं पता कि कौन कब दगा दे जाए
सफर में साथ चल रहा है कोई आपके साथ
पराया हो या हो अपना
पता नहीं कब हाथ छोड़ जाए

साथ बैठकर बातें हो रही है
और अचानक झगड़ा हो जाए
जहां सजी थी महफिल
पता नहीं कब जंग का मैदान बन जाए

अच्छे खासे मुस्कुरा रहे हैं
और कोई आपको दो बात कह जाए
फूट पड़ता गुस्सा और निकल पड़ती है गाली
कौन दोस्त कौन दुशमन पता ही नहीं चलता

शायद इसी को इसीलिए कहते हैं जिन्दगी
जहां तुम कुछ समझ सको ,जहां कुछ समझा सको
तो कभी सवालों में उलझ जाओ
तो कभी जवाबों में ही उलझ जाओ

सोमवार, 31 अगस्त 2009

दिल चाहता सिर्फ एकांतवास

वैसे हमें खुद को वक्त देना पसंद है....लेकिन इसका मतलब ये नहीं...महफिल से दूर भागते हैं...एकांत में रहने से मन को जो सूकुन मिलता है...उसकी बात ही कुछ और है...लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है  ..हम परेशान हो जाते हैं...और  लगता है... ये दुनिया ,ये महफिल मेरे किसी काम की नहीं... लेकिन अक्सर सोचती हूं ...कई लोग तो ऐसे भी होते हैं जो एकांत में ही रहना चाहते हैं... रंग बिरंगी दुनिया को छोड़कर.....बस उन्हीं सोच को लफ्जों में उतारने की एक कोशिश )

सोचने को मजबूर हूं मैं
क्यों कोई जानबूझकर वो राह चुनता है
जहां हो सिर्फ अकेलापन
क्या होती होगी उनकी मजबूरी
जहां जिंदगी लगने लगती है अधूरी

शायद उन राहों में ही पूरी होती है
उनकी खुशियों की तलाश
तू भी तन्हाई के रंग में डूब तन्हा हंस ले, रो ले
इस रंग को भी एक बार जी करके देख ले

जिंदगी कहते हैं इसी को
जहां है कभी सुख तो कहीं है दुख
कभी होती है महफिल की तलाश
तो दिल चाहता है सिर्फ ‘एकांतवास'

अक्सर लोग कहा करते हैं
जिंदगी बदल गई है मेरी
 बदल गए सारे जज्बात
लेकिन ‘एंजेला’ जिंदगी बदलती नहीं
बदल जाते हैं तो बस हालात ।

शनिवार, 29 अगस्त 2009

क्या कहें तुमसे.....

तुम्हारे साथ का वो पल
ख्यालों से अब तक जुदा न कर सके हैं
तिनका तिनका यादों के
दिल से अब तक मिटा न सके हैं
चोरी छिपे मिलती वों नजरें
होठों से अब तक छुपा न सके हैं
कहने को तो हैं कई सारी बातें
जो अब तक हम तुम्हें बता न सके......

मंगलवार, 25 अगस्त 2009

आखिर क्यूं...

तन्हाई में अक्सर
'तुमसे' बात किया करते हैं।
क्यूं करीब नहीं,दूर हो हमसे
किस्मत पर नाराज हुआ करते हैं।

साथ गुजारे हर लम्हों की
ख्यालों में जिक्र किया करते हैं।
क्यूं खामोश रहे तेरे प्यार में
उन खामोश निगाहों से सवाल किया करते हैं।

चाहा तो हमेशा कि भुला दूं तुम्हें
इस पागल दिल को समझा लिया करते हैं
क्यूं इतना प्यार है अबतक तुमसे
खुद से ही शिकायत किया करते हैं।

शनिवार, 22 अगस्त 2009

अब तुम कहो...

अब हम नहीं रहे तुम्हारे,
पर तुम अब भी हो हमारे,
तुमने कहा हमसे भुला दें तुम्हें
लो अब हमने भुला दिया तुम्हें
पर ये तो बता दो हमें
हमने तो कुछ कहा नहीं तुमसे
अब तुम कहो
क्या हमें भुला दिया तुमने?

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

ये किसने सोचा था...

ये किसने सोचा था
कमबख्त ये दिल तुम पर आएगा
हम तो बेफिक्र थे
कि तुमसे और प्यार हमें
कतई नहीं होगा
लेकिन वक्त का तकाजा तो देख
प्यार हुआ तो तुम्हीं से
ये किसने सोचा था
अब से लबों पर
सिर्फ तेरा ही नाम आएगा

सोमवार, 17 अगस्त 2009

कुछ कहना है तुमसे....

कहना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम सुनना न चाहो
जानना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम बताना न चाहो

काश,आंखों की जुबां समझ सकते
यूं तुम्हारी आवाज को न तरसते

जाना तो है बहुत दूर तलक तुमसे
पर शायद तुम जाना न चाहो
कुछ वादा लेना चाहते हैं तुमसे
पर शायद तुम निभाना न चाहो

काश,तुम मेरे पास होते
यूं तुम्हारे साथ को नहीं तरसते

देना तो बहुत कुछ है तुम्हें
पर तुम शायद मांगना न चाहो
लेना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम देना न चाहो

काश एक खता न हुई होती हमसे
यूं तुम्हारी नज़र-ए-करम को नहीं तरसते।
(नज़र-ए-करम----प्यार भरी निगाहों)

शनिवार, 15 अगस्त 2009

कितना मुश्किल है....

(प्यार जब पहली बार और सिर्फ पहली बार,वो भी पूरे दिल से किसी से होता है,तब कैसा महसूस होता है,प्यार के इकरार से पहले तक के दरम्यान को लफ्जों में पिरोने की एक कोशिश).....

किसी से दिल लगाना कितना मुश्किल है
तो प्यार को उनसे छुपाना और भी मुश्किल

आंखों की जुबां वो समझ नहीं सकते
होठों की जुबां हम कह नहीं सकते
प्यार से प्यार को जताना कितना मुश्किल है

निगाहें ढूंढ़ती हैं हमेशा उन्हें
नजरें मिलती भी है अक्सर उनसे
उस प्यार में नजरों को चुराना कितना मुश्किल है

सोचकर डरते हैं कहीं खो न दे उन्हें’
गर पाया नहीं तो खोना भी नहीं चाहते उन्हें
इस प्यार में प्यार को पाना कितना मुश्किल है

दर्द का एहसास होता है हमें
जब हम होते हैं तन्हा
प्यार में जज्बातों को बता पाना कितना मुश्किल है

प्यार एक मीठा एहसास है
तो प्यार एक मीठा दर्द भी
प्यार में प्यार को समझ पाना और भी मुश्किल

पर हमने भी माना है प्यार को बड़े प्यार से
चाहे जितनी भी हों मुश्किलें
निभाएंगे प्यार बिना किसी शिकवा शिकायत के।।।।।

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

हर कोई है 'और'...

(कुछ थे हमारे ख्वाब जो हमने खुद के लिए देखे थे, सोचा तो कभी नहीं था कि पूरा होगा ही ,लेकिन हां, दिल के किसी कोने में एक छुपी आस हमेशा से थी कि काश हमने देखे हैं जो सपने वो सच हो जाए। लेकिन हमें अब पूरा यकीन हो गया है कि अब कुछ भी मुमकिन नहीं,आप सोच रहे होंगे कि आखिर में हम बात किस चीज की कर रहे हैं...बात हमारे प्यार की..लेकिन हम अच्छे दोस्त थे,हैं और अच्छे दोस्त ही रहेंगे। बस उसी दोस्ती के नाम ........)

तुम मेरे नहीं तो मैं तुम्हारी नहीं
दिल में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरे पास नहीं तो दूर भी नहीं
प्यार के हर एहसास में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरी हकीकत नहीं तो कोई झूठ भी नहीं
ख्यालों में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम्हें पाया नहीं तो खोया भी नहीं मैंने
मेरे सिवाय तुम्हारी जिंदगी में नहीं है कोई और
मैं तुम्हारी गजल नहीं तो कोई अनजान लफ्ज भी नहीं
मेरे सिवाय तु्म्हारी जुबां पे भी नहीं है कोई और
वक्त का सितम या कहें किस्मत का फेर
मेरी जिंदगी में तुम्हारे सिवाय हर कोई है 'और'।

बुधवार, 12 अगस्त 2009

और खो दिया उनको

आज हमारे दिल में जो दर्द है शायद ही कोई समझ सकता।गर इस दर्द को किसी के साथ बांटना चाहते तो शायद सामने वाला शख्स ये कह जाता कि अरे छोड़ो न ऐसी छोटी मोटी बातें तो होती ही रहती है। तुम पागल हो । लेकिन हम बता नहीं सकते कि हमारे दिल पे क्या बीत रही है। और इस दर्द ने फिर वहीं लाकर खड़ा कर दिया हमें,जहां से एक बार होकर गुजर चुके हैं। अकेले जीने की आदत। ऐसे वक्त में जहां एक दोस्त की जरुरत है आज हम बिल्कुल अकेले है। सोचकर ही रोना आ रहा है लेकिन हम कुछ कर नहीं सकते..सिवाय अफसोस के । गलती हमने खुद की है तो सजा भी हमें ही मिलनी चाहिए। जिंदगी में पहली बार हमने कोई ऐसा काम किया है जिसपर हमें खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा है। इतना दर्द तो हमें तब मिला जब हम अपने प्यार को अपनी जिंदगी में शामिल नहीं कर पाए। और दूसरी बार आज जब दोस्ती होने से पहले ही एक दोस्त को खो दिया। फर्क इतना है उस वक्त हमने अपनी बात कहने में देर कर दी और आज का वक्त है जब हमने दिल की बात कह दी। पहली बार दिल की बात न कह पाने पर अपने प्यार को खो दिया और आज दूसरी बार एक दोस्त को अपने दिल की बात कह पाने पर खो दिया। हां ये भी सच है कि शायद वो हमें न समझ पाया हो। अब इसमें उसका क्या कसूर है तो इंसान ही न। अब हमारे दिल की बात भला वो कैसे समझ पाएगा। भूल तो हुई है हमसे हमने शायद गलत तरीके से उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया ।

कभी कह नहीं पाए थे ‘किसी से’ अपने दिल की बात
और हमने खो दिया ‘उनको’
आज कह गए ‘किसी से’ अपने दिल की बात
और आज भी हमने खो दिया ‘उनको’

एक वक्त कल का था
जहां न कह पाने का था अफसोस
एक वक्त आज का है
जहां कह पाने पर है अफसोस

कल भी पाना चाहा था और आज भी पाना चाहे थे हम
है फर्क सिर्फ इतना
कल को हमारा प्यार था, आज को हमारी दोस्ती
पर ‘उन्हें’ भी खो दिया और ‘उसे’ भी खो दिया

दर्द को समझना हो गया बिल्कुल आसान
लेकिन प्यार को समझना अब भी मुश्किल
अब तो आंसूओं की आदत सी हो गई हैं हमें
पता नहीं कब तलक इस तरह का दर्द मिलता रहे

उन दिनों हमसे छूट गया था वक्त
इस बार आगे निकल गया वक्त
सब वक्तों का खेल है 'एंजेला'
ऐसा लगता मानो हमसे रुठ गया है वक्त।

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

रहना है तेरे दिल में....

कैसे मैं कहूं तुझसे, रहना है तेरे दिल में...
कैसे मैं कहूं तुझसे, रहना है तेरे दिल में...

फिल्म रहना है तेरे दिल में का ये सैड सॉन्ग हमें बहुत पसंद है। इसकी सिर्फ ये ही एक वजह नहीं है कि ये सॉन्ग बहुत टचिंग है, बल्कि ये दो लाइन हमारी जिंदगी से भी होकर गुजरती है। पहले इस गाने के बोल के मायने हम समझते नहीं थे। लेकिन हमारी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ कि.....अब जब भी इस गाने की धुन हमतक पहुंचती है या फिर कभी याद आ जाती है, तब तब हमें एक मीठा दर्द का एहसास होता है। जो किसी की याद में एक तड़प छोड़ जाती है। इस तड़प में प्यार की जो चुभन होती है वो कुछ पलों के लिए हमारे होठों को बेजुबान और आंखों को नम कर देती है। और पलभर के लिए जिंदगी की किताब को पलटना शुरु कर देते हैं जहां एक चैपटर हमारे प्यार का। प्यार के इस चैपटर में कई पन्ने हैं जहां पर एक पन्ना यादों की गलियारों में लहराता हुआ वर्तमान में ला खड़ा करता है। हम ये सोचने पर मजबूर हो जाते है कि हम अपनी जिंदगी में सही कर रहे हैं या फिर गलत। कभी कभी तो लगता है कि हां हम सही कर रहे हैं पर .....कभी कभी लगता है कि नहीं हम अपने ही साथ ऐसा क्यूं कर रहे हैं। बात हम अपने प्यार की कर रहे हैं। हमें पता है कि वक्त हमारी सोच से काफी आगे निकल चुकी है ।लेकिन बार बार हम एक ही बात पर ठहर क्यूं जाते हैं। हमें मालूम है कि दिल कुछ और कहता है और दिमाग कुछ और।

खैर ये जो भी कहें....
पर हम तो यही सोचा करते हैं...
कैसे मैं कहूं तुझसे....
रहना है तेरे दिल में....

बिन तेरे क्या है जीना.....

( तुमसे हम कोई वादा कर नहीं सकते...गर वादा कर भी लिया तो निभा नहीं सकते। ये जिंदगी भी कितनी अजीब है ,इतनी अजीब कि कभी-कभी सोचने का हक भी नहीं रख सकते। उन सोच को एक एहसास में बदल दिया है, बस उस दरम्यान की कुछेक लब्ज...)

बिन तेरे क्या है जीना ये कहना आसान है लेकिन निभाना मुश्किल । जब भी ये सोचते हैं तब भी मन बोझिल हो जाता है । क्योंकि हम ये सिर्फ एहसास कर सकते हैं लेकिन इतनी हिम्मत नहीं कि हम ‘उन्हें’ ये कह सके । क्योंकि जिंदगी हर तरह से खूबसूरत है। चाहे क्यों न जितने भी दर्द मिले हों, हां हो सकता है दर्द आंसूओं में न छलके हों लेकिन ये तो सच है जिंदगी चाहे जितना भी लिबास ओढ़ ले हर लिबास में खबूसूरत लगती है। जिंदगी से कोई शिकायत नहीं कि वो हमें क्यों नहीं मिले, और मिले भी तो इस तरह से कि हमारे हो न सके। बस इसी के दौरान दिल ने चाहा...तो लिख दिया .....

तुम नहीं मिले तो प्यार में कुछ रंग कम पड़ गए,
तुम मिलते तो शायद जिंदंगी और भी रंगीन हो जाती।
तुम्हारा रंग न सही कोई और रंग होगा
उन्हीं रंगों में तुम्हारे होने का एहसास होगा
न चाहते हुए भी उन रंगों में रंगना होगा
दिल तो कहता बिन तेरे क्या है जीना
पर जिंदगी कहती बस ‘गुमनाम’
तुमको है सिर्फ उनके बिना जीना......