गुरुवार, 13 अगस्त 2009

हर कोई है 'और'...

(कुछ थे हमारे ख्वाब जो हमने खुद के लिए देखे थे, सोचा तो कभी नहीं था कि पूरा होगा ही ,लेकिन हां, दिल के किसी कोने में एक छुपी आस हमेशा से थी कि काश हमने देखे हैं जो सपने वो सच हो जाए। लेकिन हमें अब पूरा यकीन हो गया है कि अब कुछ भी मुमकिन नहीं,आप सोच रहे होंगे कि आखिर में हम बात किस चीज की कर रहे हैं...बात हमारे प्यार की..लेकिन हम अच्छे दोस्त थे,हैं और अच्छे दोस्त ही रहेंगे। बस उसी दोस्ती के नाम ........)

तुम मेरे नहीं तो मैं तुम्हारी नहीं
दिल में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरे पास नहीं तो दूर भी नहीं
प्यार के हर एहसास में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरी हकीकत नहीं तो कोई झूठ भी नहीं
ख्यालों में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम्हें पाया नहीं तो खोया भी नहीं मैंने
मेरे सिवाय तुम्हारी जिंदगी में नहीं है कोई और
मैं तुम्हारी गजल नहीं तो कोई अनजान लफ्ज भी नहीं
मेरे सिवाय तु्म्हारी जुबां पे भी नहीं है कोई और
वक्त का सितम या कहें किस्मत का फेर
मेरी जिंदगी में तुम्हारे सिवाय हर कोई है 'और'।

2 टिप्‍पणियां:

सैयद | Syed ने कहा…

सुन्दर !!

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

स्वतंत्रा दिवस जी हार्दिक शुभकामनाएँ