शनिवार, 29 अगस्त 2009

क्या कहें तुमसे.....

तुम्हारे साथ का वो पल
ख्यालों से अब तक जुदा न कर सके हैं
तिनका तिनका यादों के
दिल से अब तक मिटा न सके हैं
चोरी छिपे मिलती वों नजरें
होठों से अब तक छुपा न सके हैं
कहने को तो हैं कई सारी बातें
जो अब तक हम तुम्हें बता न सके......

4 टिप्‍पणियां:

शरद कोकास ने कहा…

बिलकुल कॉपी के पिछले पन्ने पर लिखी कविता जैसी लगती है ..।

ओम आर्य ने कहा…

बिल्कुल ही सही एहसास है गुमनाम गली ....जज्बात की......कई ऐसे एहसास होते है जो गुमनाम ही होते है और उनके गुमनाम हो जाने मे भलाई है......सुन्दर

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

बहुत अच्छे

AlbelaKhatri.com ने कहा…

एक तो आप बताने में बड़ा वक्त लगाते हैं...........
जल्दी से बताया करो न.................