रविवार, 5 फ़रवरी 2012

जिंदगी यूं ही जीते चले जाएंगे

तुमसे कहने की कई बार कोशिश की थी मैंने
पर तुमने कोशिश ही नहीं की समझने की
जताना चाहती थी
चाहती थी एहसास दिलाना
पर तुम मेरे साथ नहीं थे
पास होकर भी थे कोसो दूर
मुझे खुद पर रोना आया
हालात को भी दो चार सुनाया
पर वो वक्त शायद मेरी किस्मत में नहीं
चलो ये वक्त भी गुजार लिए
वो वक्त भी बिता दिए
जिंदगी यूं ही जीते चले जाएंगे
 

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

ये दिल बेचारा

कुछ कहा नहीं जाता
कुछ सहा नहीं जाता
क्या करे दिल ये बेचारा
तुम बिन जिया नहीं जाता
दिल ही ने दूर किया
अब दिल ने ही मजबूर किया
हर फिक्र को छोड़
हर फर्क को मिटाकर
ये प्यार बस तुम्हारे पास जाना चाहता !

बुधवार, 25 जनवरी 2012

यादों से प्यार

(बस दिल किया कि प्यार के नाम दो लाइन लिखूं तो लिख दिया)

दिल के रंगीन पन्नों पर लिखा मैंने तेरा नाम
तुमने तो लिखा था कोरे कागज पर मेरा नाम
फिक्र नहीं की मिट गई वो कागज पर की स्याही
फिक्र है दिल पर लिखे नाम को मिटाऊं कैसे
नाराज नहीं तुमसे कि तुम मुझसे दूर चले गए
नाराज हूं खुदसे तुमसे दूर होकर भी करीब हूं तुझसे
नाता नहीं तुम्हें मेरे प्यार से
पर नाता है मेरा तेरे प्यार से
कभी करती थी तुम्हारे प्यार पर राज
आज करती हूं तुम्हारी यादों से प्यार।

शनिवार, 21 जनवरी 2012

प्यार का साया

( आज अपनी दोस्त सब्बी के साथ किताबों के उन्न पन्नों को खोला जो मैंने बंद कर रखा है)


दिल के समंदर में
वो यादों की लहर
फिर खा रही हैं हिचकोले,
न दूर तक का कोई किनारा
और न ही हवा के रूख का कोई सहारा
न जाने तेरी य़ाद ने क्यों ली अंगड़ाई
जिंदगी की लड़ी थोड़ी सी डगमगाई
काश किस्मत को वो प्यार गंवारा होता
इस दिल को किसी और का सहारा न होता
जिंदगी पर वक्त का साथ होता
हमारे साथ अपने प्यार का साया होता
इकरार है हमें नहीं है कोई इंकार
आज भी है प्यार का साया हमपर
पर हम बन गए हैं किसी और के प्यार के साय़े।

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

हमने तुमको याद किया .....

(कहते हैं जब दो दिल का मिलना हो तो इत्तफाक ही सही मिलते जरूर हैं.....कभी किसी को दिल से याद करो और उसी दरम्यान याद आने वाला शख्स तुम्हें याद करे तो ........)

तुम्हारी यादों से निकल कर
कुछ दूर तलक चले ही थे हम
और तुम्हारी परछाई ने
फिर वापस आने को मजबूर किया
तुम्हें भूलकर दो कदम निकले ही थे हम
और फिर हमारे दिल ने लौटने पर मजबूर किया.........................

सोमवार, 23 अगस्त 2010

दिल को कैसे समझाएं.....

( किसी को भूलना जिससे आप बहुत प्यार करते हो...लेकिन कभी कभी जिंदगी ऐसी करवट लेती है कि आपको मजबूर होकर भूलाना पड़े तो कितना मुश्किल है....)

दिल को कैसे मनाएं
दिल को कैसे समझाएं
तेरी याद जाती नहीं
तेरा प्यार हटता ही नहीं
तुम्हें भूल पाना अब हमारे बस में नहीं.......

तुम कहते हो भूल जाऊं तुम्हें
पर तुम चाहते नहीं मैं भूला दूं तुम्हें
तुम कहते दूर हो जाऊं तुझसे
पर तुम चाहते नहीं दूर हो जाऊं तुमसे
न जाने ये कैसी कसमकश है
जब दिल चाहता कुछ औऱ है
पर करना पड़ता कुछ औऱ है...........


दिल को क्या बताएं
दिल को क्या सुनाएं
ये दिल तो दिल के हाथों खुद मजबूर है
जो कहता है मुझसे
तुम्हें भूल पाना अब हमारे बस में नहीं है....

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

न जाने कहां चले गए थे हम

कहां चले गए थे हम
एहसासों की दुनिया से दूर
जिंदगी की हकीकत को
जानने की कोशिश में
भटक गए थे कहीं दूर
हां हमें खुद भी नहीं पता
कहां चले गए थे हम

कागज और कलम से नाता तोड़
एहसास और जज्बात को छोड़
कोई ख्वाब नहीं, और न कोई ख्वाहिश
बगैर आप सभों का साथ
चले थे जिंदगी को जीने
पता नहीं कहां चले गए थे हम

रास न आई आपके बगैर ये जिंदगी
फिर से आ लौटे
हम सबकी दुनिया में
फिर होंगे खटटे मीठे एहसास
तो दिल के कोने में दबे दर्द का इकबाल ए बयां
हां हम लौट आए हैं
उसी गुमनाम गली में
जहां गुमनाम होकर भी
एक अपनी पहचान है।

(हम बहुत दिनों तक आप सभी से दूर रहे....याद तो आई आप सबकी ...पर वक्त न दे पाने के गुनहगार हैं ...हम...बस बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से मुलाकात पर ये दिल के एहसास......)

रविवार, 24 जनवरी 2010

अच्छा लगता है मुझको...

(कभी कभी जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो हमें अच्छी लगती है बस उसी पर ये नजराना)

तेरा पास आना
पास आकर के गुजर जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा नजर मिलाना
नजरें मिलाके नजर चुरा जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा मुस्कुराना
मुस्कुराके चले जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा दूर जाना
दूर जाके प्यार अपना जताना
अच्छा लगता है मुझको ।
तुम्हें बहुत कुछ है अभी बताना
कुछ नहीं बता के आंखों से कह देना
अच्छा लगता है मुझको ।
तुम्हारा मेरा कोई न होना
कुछ न होकर भी बहुत कुछ होना
अच्छा लगता है मुझको।
बस अब और क्या कहूं
सब बातों को सोचके
सोचकर वक़्त बिताना
अच्छा लगता है मुझको।

इस रिश्ते को क्या नाम दूं ?

(कुछ रिश्तों को लेकर अनजान हूं मैं, समझ नहीं आता रिश्तों से जुड़े हर डोर को किस किस नामसे पुकारुं, कभी कभी ऐसा होता है कुछ लोग बनने वाले हर रिश्ते से भी ज्यादा ओहदे के होते हैं तो कुछ मिले रिश्तों के नाम से भी कम की अहमियत रखते हैं, और कुछ तो ऐसे होते हैं जिन्हे रिश्तों की डोर में बांधना मुश्किल हो जाता है और तब जब रिश्ता का नाम समझ में न आए।)

एक किताब है मेरी जिंदगी
जिसमें हैं प्यार के दो लब्ज
नहीं पता मुझे,उन लब्जों को
रिश्तों का कौन सा नाम दूं
एक कहानी की शुरुआत है
तो दूसरा कहानी का अंत
लेकिन जिसने पिरोया है
उन शब्दों से बनती है
एक अनजान परिभाषा
दिल को समझाया कई बार
जिंदगी एक अक्षर पर शुरु नहीं
और न ही एक अक्षर पर खत्म
ये तो एक पूरी किताब है
जिसपर है कई शब्दों का मेल
तो जगह जगह पर लफ्जों का खेल
दिल तो कहता है हमसे बार बार
भावनाओं की दरिया में मत बह
वरना जिंदगी की हर हकीकत से बेखबर
डूब जाएगी तेरी कश्ती
थाम ले तू सच्चाई को
जान ले तू हर डोर को
हर रुख का सामना कर
अपने मन की माना कर
इसे ही तो कहते हैं रिश्तों की दुनिया
जो शुरु कहीं से होती है
तो खत्म कहीं और पर।

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

कमबख्त ये आंसू

(हर कोई मुझसे कहता कि मैं बहुत कमजोर हूं। दिल को दुखाने वाली हर छोटी छोटी बातों को लेकर रो पड़ती हूं। मेरे दिल के करीब रहनेवाले सभी यही कहते कि मैं बेवकूफ हूं जो हर किसी के लिए आंसू बहाती हूं। उनका कहना है कि मुझे उनके लिए आंसू बहाना चाहिए जो मेरे अपने हों । लेकिन मैं ये कैसे साबित करुं कि चाहे कोई वो मेरे अपने हों या पराए जब भी मेरा दिल दुखता है तो आंसू अपने आप झरने लगते हैं जिनको चाहकर भी मैं रोक नहीं पाती।)

कौन कहता है कि रोना हमें पसंद है
हां हमें रोना पसंद है, पर ये आंसू नहीं
लेकिन कमबख्त नालायक आंसू
हर छोटी छोटी बातों का संदेशा ले आती
मेरे मासूम से चेहरे को और भी दर्द दे जाती
ये बेमतलबी आंसू हर जगह मुझे कमजोर बनाते हैं
लोगों को बोलने का मौका मिल जाता
रोनेवाली बात ही नहीं फिर तुम रोती क्यों हो
अब मैं हर किसी को कैसे समझाऊं
दर्द देनेवाली हर छोटी बात
मेरे लिए एक बड़ी बात है
जो मेरे जेहन से होकर दिल को छूती है
और दुख के दरिया में आंसूओं का सागर
मेरे चेहरे पर आ मिलता है......

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

समझना अभी भी बाकी है....

ऐसा लगता है मुझे
समझ न सके हैं दुनिया को अबतक
क्योंकि हंसते हंसते रोने लगते हैं
तो कभी रोते रोते हंस पड़ते

नहीं पता कि कौन कब दगा दे जाए
सफर में साथ चल रहा है कोई आपके साथ
पराया हो या हो अपना
पता नहीं कब हाथ छोड़ जाए

साथ बैठकर बातें हो रही है
और अचानक झगड़ा हो जाए
जहां सजी थी महफिल
पता नहीं कब जंग का मैदान बन जाए

अच्छे खासे मुस्कुरा रहे हैं
और कोई आपको दो बात कह जाए
फूट पड़ता गुस्सा और निकल पड़ती है गाली
कौन दोस्त कौन दुशमन पता ही नहीं चलता

शायद इसी को इसीलिए कहते हैं जिन्दगी
जहां तुम कुछ समझ सको ,जहां कुछ समझा सको
तो कभी सवालों में उलझ जाओ
तो कभी जवाबों में ही उलझ जाओ

सोमवार, 31 अगस्त 2009

दिल चाहता सिर्फ एकांतवास

वैसे हमें खुद को वक्त देना पसंद है....लेकिन इसका मतलब ये नहीं...महफिल से दूर भागते हैं...एकांत में रहने से मन को जो सूकुन मिलता है...उसकी बात ही कुछ और है...लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है  ..हम परेशान हो जाते हैं...और  लगता है... ये दुनिया ,ये महफिल मेरे किसी काम की नहीं... लेकिन अक्सर सोचती हूं ...कई लोग तो ऐसे भी होते हैं जो एकांत में ही रहना चाहते हैं... रंग बिरंगी दुनिया को छोड़कर.....बस उन्हीं सोच को लफ्जों में उतारने की एक कोशिश )

सोचने को मजबूर हूं मैं
क्यों कोई जानबूझकर वो राह चुनता है
जहां हो सिर्फ अकेलापन
क्या होती होगी उनकी मजबूरी
जहां जिंदगी लगने लगती है अधूरी

शायद उन राहों में ही पूरी होती है
उनकी खुशियों की तलाश
तू भी तन्हाई के रंग में डूब तन्हा हंस ले, रो ले
इस रंग को भी एक बार जी करके देख ले

जिंदगी कहते हैं इसी को
जहां है कभी सुख तो कहीं है दुख
कभी होती है महफिल की तलाश
तो दिल चाहता है सिर्फ ‘एकांतवास'

अक्सर लोग कहा करते हैं
जिंदगी बदल गई है मेरी
 बदल गए सारे जज्बात
लेकिन ‘एंजेला’ जिंदगी बदलती नहीं
बदल जाते हैं तो बस हालात ।

शनिवार, 29 अगस्त 2009

क्या कहें तुमसे.....

तुम्हारे साथ का वो पल
ख्यालों से अब तक जुदा न कर सके हैं
तिनका तिनका यादों के
दिल से अब तक मिटा न सके हैं
चोरी छिपे मिलती वों नजरें
होठों से अब तक छुपा न सके हैं
कहने को तो हैं कई सारी बातें
जो अब तक हम तुम्हें बता न सके......

मंगलवार, 25 अगस्त 2009

आखिर क्यूं...???

तन्हाई में अक्सर
'तुमसे' बात किया करते हैं।
क्यूं करीब नहीं, दूर हो हमसे
किस्मत पर नाराज हुआ करते हैं।

साथ गुजारे हर लम्हों की
ख्यालों में जिक्र किया करते हैं।
क्यूं खामोश रहे तेरे प्यार में
खुद से शिकायत किया करते।

चाहा कि भूला दूँ तुम्हें
पागल दिल को समझा लिया करते हैं
क्यूं अबतक प्यार है तुमसे
आज भी सवाल किया करते हैं।

शनिवार, 22 अगस्त 2009

अब तुम कहो...

अब हम नहीं रहे तुम्हारे,
पर तुम अब भी हो हमारे,
तुमने कहा हमसे भुला दें तुम्हें
लो अब हमने भुला दिया तुम्हें
पर ये तो बता दो हमें
हमने तो कुछ कहा नहीं तुमसे
अब तुम कहो
क्या हमें भुला दिया तुमने?

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

ये किसने सोचा था...

ये किसने सोचा था
कमबख्त ये दिल तुम पर आएगा
हम तो बेफिक्र थे
कि तुमसे और प्यार हमें
कतई नहीं होगा
लेकिन वक्त का तकाजा तो देख
प्यार हुआ तो तुम्हीं से
ये किसने सोचा था
अब से लबों पर
सिर्फ तेरा ही नाम आएगा

सोमवार, 17 अगस्त 2009

कुछ कहना है तुमसे....

कहना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम सुनना न चाहो
जानना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम बताना न चाहो

काश,आंखों की जुबां समझ सकते
यूं तुम्हारी आवाज को न तरसते

जाना तो है बहुत दूर तलक तुमसे
पर शायद तुम जाना न चाहो
कुछ वादा लेना चाहते हैं तुमसे
पर शायद तुम निभाना न चाहो

काश,तुम मेरे पास होते
यूं तुम्हारे साथ को नहीं तरसते

देना तो बहुत कुछ है तुम्हें
पर तुम शायद मांगना न चाहो
लेना तो बहुत कुछ है तुमसे
पर शायद तुम देना न चाहो

काश एक खता न हुई होती हमसे
यूं तुम्हारी नज़र-ए-करम को नहीं तरसते।
(नज़र-ए-करम----प्यार भरी निगाहों)

शनिवार, 15 अगस्त 2009

कितना मुश्किल है....

(प्यार जब पहली बार और सिर्फ पहली बार,वो भी पूरे दिल से किसी से होता है,तब कैसा महसूस होता है,प्यार के इकरार से पहले तक के दरम्यान को लफ्जों में पिरोने की एक कोशिश).....

किसी से दिल लगाना कितना मुश्किल है
तो प्यार को उनसे छुपाना और भी मुश्किल

आंखों की जुबां वो समझ नहीं सकते
होठों की जुबां हम कह नहीं सकते
प्यार से प्यार को जताना कितना मुश्किल है

निगाहें ढूंढ़ती हैं हमेशा उन्हें
नजरें मिलती भी है अक्सर उनसे
उस प्यार में नजरों को चुराना कितना मुश्किल है

सोचकर डरते हैं कहीं खो न दे उन्हें’
गर पाया नहीं तो खोना भी नहीं चाहते उन्हें
इस प्यार में प्यार को पाना कितना मुश्किल है

दर्द का एहसास होता है हमें
जब हम होते हैं तन्हा
प्यार में जज्बातों को बता पाना कितना मुश्किल है

प्यार एक मीठा एहसास है
तो प्यार एक मीठा दर्द भी
प्यार में प्यार को समझ पाना और भी मुश्किल

पर हमने भी माना है प्यार को बड़े प्यार से
चाहे जितनी भी हों मुश्किलें
निभाएंगे प्यार बिना किसी शिकवा शिकायत के।।।।।

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

हर कोई है 'और'...

(कुछ थे हमारे ख्वाब जो हमने खुद के लिए देखे थे, सोचा तो कभी नहीं था कि पूरा होगा ही ,लेकिन हां, दिल के किसी कोने में एक छुपी आस हमेशा से थी कि काश हमने देखे हैं जो सपने वो सच हो जाए। लेकिन हमें अब पूरा यकीन हो गया है कि अब कुछ भी मुमकिन नहीं,आप सोच रहे होंगे कि आखिर में हम बात किस चीज की कर रहे हैं...बात हमारे प्यार की..लेकिन हम अच्छे दोस्त थे,हैं और अच्छे दोस्त ही रहेंगे। बस उसी दोस्ती के नाम ........)

तुम मेरे नहीं तो मैं तुम्हारी नहीं
दिल में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरे पास नहीं तो दूर भी नहीं
प्यार के हर एहसास में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम मेरी हकीकत नहीं तो कोई झूठ भी नहीं
ख्यालों में सिवाय तुम्हारे नहीं है कोई और
तुम्हें पाया नहीं तो खोया भी नहीं मैंने
मेरे सिवाय तुम्हारी जिंदगी में नहीं है कोई और
मैं तुम्हारी गजल नहीं तो कोई अनजान लफ्ज भी नहीं
मेरे सिवाय तु्म्हारी जुबां पे भी नहीं है कोई और
वक्त का सितम या कहें किस्मत का फेर
मेरी जिंदगी में तुम्हारे सिवाय हर कोई है 'और'।

बुधवार, 12 अगस्त 2009

और खो दिया उनको

आज हमारे दिल में जो दर्द है शायद ही कोई समझ सकता।गर इस दर्द को किसी के साथ बांटना चाहते तो शायद सामने वाला शख्स ये कह जाता कि अरे छोड़ो न ऐसी छोटी मोटी बातें तो होती ही रहती है। तुम पागल हो । लेकिन हम बता नहीं सकते कि हमारे दिल पे क्या बीत रही है। और इस दर्द ने फिर वहीं लाकर खड़ा कर दिया हमें,जहां से एक बार होकर गुजर चुके हैं। अकेले जीने की आदत। ऐसे वक्त में जहां एक दोस्त की जरुरत है आज हम बिल्कुल अकेले है। सोचकर ही रोना आ रहा है लेकिन हम कुछ कर नहीं सकते..सिवाय अफसोस के । गलती हमने खुद की है तो सजा भी हमें ही मिलनी चाहिए। जिंदगी में पहली बार हमने कोई ऐसा काम किया है जिसपर हमें खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा है। इतना दर्द तो हमें तब मिला जब हम अपने प्यार को अपनी जिंदगी में शामिल नहीं कर पाए। और दूसरी बार आज जब दोस्ती होने से पहले ही एक दोस्त को खो दिया। फर्क इतना है उस वक्त हमने अपनी बात कहने में देर कर दी और आज का वक्त है जब हमने दिल की बात कह दी। पहली बार दिल की बात न कह पाने पर अपने प्यार को खो दिया और आज दूसरी बार एक दोस्त को अपने दिल की बात कह पाने पर खो दिया। हां ये भी सच है कि शायद वो हमें न समझ पाया हो। अब इसमें उसका क्या कसूर है तो इंसान ही न। अब हमारे दिल की बात भला वो कैसे समझ पाएगा। भूल तो हुई है हमसे हमने शायद गलत तरीके से उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया ।

कभी कह नहीं पाए थे ‘किसी से’ अपने दिल की बात
और हमने खो दिया ‘उनको’
आज कह गए ‘किसी से’ अपने दिल की बात
और आज भी हमने खो दिया ‘उनको’

एक वक्त कल का था
जहां न कह पाने का था अफसोस
एक वक्त आज का है
जहां कह पाने पर है अफसोस

कल भी पाना चाहा था और आज भी पाना चाहे थे हम
है फर्क सिर्फ इतना
कल को हमारा प्यार था, आज को हमारी दोस्ती
पर ‘उन्हें’ भी खो दिया और ‘उसे’ भी खो दिया

दर्द को समझना हो गया बिल्कुल आसान
लेकिन प्यार को समझना अब भी मुश्किल
अब तो आंसूओं की आदत सी हो गई हैं हमें
पता नहीं कब तलक इस तरह का दर्द मिलता रहे

उन दिनों हमसे छूट गया था वक्त
इस बार आगे निकल गया वक्त
सब वक्तों का खेल है 'एंजेला'
ऐसा लगता मानो हमसे रुठ गया है वक्त।