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सोमवार, 9 अप्रैल 2012

प्यार तो फिर भी है

(जब कोई प्यार के आंसुओं की कद्र नहीं करता)

लफ्जों में छुपा दर्द
बना कतरा आंसू का
तुमको लगा ऐसा
पानी की बूंदें हैं
सलीके से बह जाने दो
अब नहीं है कोई ख्वाब
हर आरजू में तुमको देखा
निगाहों को नहीं अब
किसी अपनों की तलाश
मोहब्बत ने छोड़ा हाथ
गमों ने अपनाया साथ
अल्फाजों को चुनती हूं
दर्द-ए-बयां के लिए
काश ये न कहना पड़े
न तुम आते
न प्यार होता
इन आंखों को कभी
तेरा  न इंतजार होता ।

बुधवार, 25 जनवरी 2012

यादों से प्यार

(बस दिल किया कि प्यार के नाम दो लाइन लिखूं तो लिख दिया)

दिल के रंगीन पन्नों पर लिखा मैंने तेरा नाम
तुमने तो लिखा था कोरे कागज पर मेरा नाम
फिक्र नहीं की मिट गई वो कागज पर की स्याही
फिक्र है दिल पर लिखे नाम को मिटाऊं कैसे
नाराज नहीं तुमसे कि तुम मुझसे दूर चले गए
नाराज हूं खुदसे तुमसे दूर होकर भी करीब हूं तुझसे
नाता नहीं तुम्हें मेरे प्यार से
पर नाता है मेरा तेरे प्यार से
कभी करती थी तुम्हारे प्यार पर राज
आज करती हूं तुम्हारी यादों से प्यार।