(बस दिल किया कि प्यार के नाम दो लाइन लिखूं तो लिख दिया)
दिल के रंगीन पन्नों पर लिखा मैंने तेरा नाम
तुमने तो लिखा था कोरे कागज पर मेरा नाम
फिक्र नहीं की मिट गई वो कागज पर की स्याही
फिक्र है दिल पर लिखे नाम को मिटाऊं कैसे
नाराज नहीं तुमसे कि तुम मुझसे दूर चले गए
नाराज हूं खुदसे तुमसे दूर होकर भी करीब हूं तुझसे
नाता नहीं तुम्हें मेरे प्यार से
पर नाता है मेरा तेरे प्यार से
कभी करती थी तुम्हारे प्यार पर राज
आज करती हूं तुम्हारी यादों से प्यार।
कई बार ऐसा होता है कि हम अपने दिल की बात किसी से कह भी नहीं पाते और दबी जुबां बस यही सोचा करते कि,काश हम अपने दिल की बात कह गए होते,बस उन्हीं जज्बात को शब्दों में पिरोकर यहां सहेजे हुए हैं,हम हमेशा से अपनी भावनाओं को लोगों के सामने रखने से डरते आए हैं,बस ये सोचकर कि पता नहीं लोग क्या सोचेंगे...लेकिन कब तक..और आखिर में थाम लिया इस गुमनाम गलियारे का सहारा.....वैसे भी अंधेरी गलियों में लोगों का आना जाना कम होता है..लेकिन आप जो कोई भी आएंगें इस गलियारे में,तहे दिल से स्वागत एवं आभार...Anjel
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बुधवार, 25 जनवरी 2012
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