सोमवार, 15 जून 2020

बेमौसम याद


बेमौसम याद ने उनकी
खूब रुलाया हमको
मजबूरियां ओढ़ रखी थी
वरना
भीगने की ख्वाहिश
थी थोड़ी सी मेरी !!!

एंजेला "गुड्डू"
16 जून 2020

#thoughts_from_me ✒️
#poetic_heart_✍️_❤️

बुधवार, 13 अप्रैल 2016

दिल से

हमें गुमां था उसके दिल जीतने का
वो तो पहले ही दिल हारे बैठे हैं !!!

शुक्रवार, 1 जून 2012

मोहब्बत

निगाहों में उनकी एक आस थी
जुबां पर नहीं, दिल में कोई बात थी
न समझने की गलती फिर की मैंने
लेकिन लबों में उसके शिकवा नहीं
मेरे लिए कायनात की मोहब्बत थी ।
चाहा इजहार करूं  उनसे मोहब्बत की
पर रोक लिया लब्जों को लबों पे
जाने दो यारों बेकरार इकरार को
पता तो चले दिल टूटने का दर्द 'एंजेला'
मोहब्बत  दो दिलों की प्यास थी।


बुधवार, 25 अप्रैल 2012

नहीं कोई अब आऱजू

(जब किसी से बेइंतहा मोहब्बत हो, और मोहब्बत बेवफा निकले)

मोहब्बत के रंगीन पनाहों में
कैद हुए इश्क के दरबार में
खुशनुमा ख्वाबों के साए में
दीवाने हुए तेरी मोहब्बत में

नादान दिल को नहीं कोई अब आऱजू

ख्वाब तुम्हीं से था, प्यार तुम्हीं से था
हर लफ्जों पर इकरार तुम्हीं से था

जाने  कैसा जादू किया
तुम बिन जीना दुशवार हुआ
जिंदगी को  हम गंवारे नहीं
हमें तुमने संवारे नहीं

नादान दिल को नहीं कोई अब आऱजू

वफा की चादर ओढ़े छेड़ती हैं तुम्हारी यादें
बेवफाई का दर्द देती हैं तुम्हारी यादें

वफा की लाज की खातिर
हमने दिल  को समझाया, दिल ने हमें
दर्द- ए - प्यार का मौसम आया
मगर जिनको आना था नहीं आए

नादान दिल को नहीं कोई अब आऱजू ।


शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

जियो जी भरके

                                 
                       कभी कभी सोचते हैं काश  हमारे पास कोई जादुई शक्ति होती जिससे हम अपनी जिंदगी को Best बना लेते। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ खुशियां होती, दुखों के लिए कोई जगह नहीं होता । लेकिन ऐसा नहीं है । किसी ने कहा है - एक जंग ही सही मोहब्बत है जिंदगी, कुदरत ने जो बख्शी वो नैमत है जिंदगी...मानो न मानो  ऐ दोस्तो मगर....खुदा की दी हुई अमानत है जिंदगी।’’ क्या है जिंदगी इस सवाल पर कई जवाब होंगे। यूं तो जिंदगी को जीने के लिए हर किसी का नजरिया अलग होता है । प्यार में डूबे लोगों के लिए मोहब्बत है जिंदगी, तो नाकाम लोगों के लिए अभिशाप है जिंदगी। बच्चों के लिए खिलौना है जिंदगी तो मां बाप के लिए responsibility है जिंदगी। खुले आसमान में उड़नेवाले परिंदों के लिए उड़ान भरने का नाम है जिंदगी। किसी के लिए बसंत बयार है जिंदगी तो किसी के लिए पतझड़ का मौसम है जिंदगी। खुदा ने सबकुछ तय करके इस जिंदगी को हमारे लिए तोहफे के रुप में दिया
                           
                         खैर आपका नजरिया जो भी हो, लेकिन कुछ लफ्जों में जिंदगी को बांधना बहुत मुश्किल है। इंसान के पैदा होते ही हर शख्स जिंदगी और मौत के साथ रिश्ता जोड़ लेता है। मौत को जब आना होगा तब आएगी लेकिन जब ऊपर वाले ने एक बार एक खूबसूरत जिंदगी दी है तो खुशी से और जिंदादिली से जीयो। जिंदगी के हर लम्हें को 'सेलिब्रेट' करके जीने की कोशिश करो। कहने की जरूरत नहीं कि जिंदगी में सुख दुख का आना जाना लगा रहेगा। जिसका सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।वो जिंदगी भी क्या जिसमें जीने का मजा न हो और जीने का मजा लेने के लिए उतार चढ़ाव और जिंदगी के हर रंग को देखना ही होगा।
                    खुशी से जीने का हक सबको है। हां दुनियादारी की बातें हमें उलझाने की कोशिश करती हैं । आप सोच रहे होंगे कि मुसीबत और दुःख तकलीफों के के बीच कोई भला कैसे खुश रह सकता है, बुरे वक्त में अच्छे-अच्छे घबरा जाते हैं। हां हालात कभी कभी बहुत ही नाजुक हो जाते है लेकिन उस बुरे वक्त का डटकर मुकाबला करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। मुसीबत की हर बाधा को पार करने के बाद होठों पर की मुस्कुराहट और दिल को जो सूकून मिलता है उसको बयां करना बहुत मुश्किल । दरअसल, यह बात भी आपके सोचने के नजरिए पर है। यदि आप कठिनाइयों को सकारात्मक ढंग से लेंगे तो आपको उस दौर में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उस दौर के गुजरने के बाद आप पहले से कहीं अधिक मजबूत बनकर निकलेंगे, तो इसमें भी खुश होने की वजह  है   ।       
                    
                      आप अपनी जिंदगी में आने वाले हर वक्त को दिल से स्वीकार कर जिंदगी के मजे लूटिए, आनंद मनाइए। छोटी-छोटी चीजों में खुशी तलाशिए। ईश्वर ने हमें जिंदगी खुशी से बिताने के लिए दिया है इसलिए हम सभी को कोशिश करना चाहिए कि हम किसी के दुख का कारण बनने के बजाय सबके लिए खुशी की वजह बनने की कोशिश करें। आप दूसरों को खुशी देकर भी खुशी पा सकते हैं । एक प्यारी-सी मुस्कान और मदद का हाथ बढ़ाकर भी आप खुश हो सकते हैं। प्रार्थना कीजिए, ध्यान लगाइए इससे आपके मन को शांति मिलेगी। शांत मन दुःख आने पर भी विचलित नहीं होगा, बल्कि अपने दुःखों से पार पाने की शक्ति देगा। हर पल, हर लम्हा, हर दिन खुश रहिए, वरना इस सुपरफास्ट दुनिया में आधुनिक होती जीवन शैली में खुशी को ढूंढते रह जाएंगे।                    
                       
                     मेरे दोस्तो जाते जाते कहना चाहूंगी जिंदगी जीय़ो जी भर के क्योंकि ये जिंदगी फिर न मिलेगी दोबारा।

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

प्यार तो फिर भी है

(जब कोई प्यार के आंसुओं की कद्र नहीं करता)

लफ्जों में छुपा दर्द
बना कतरा आंसू का
तुमको लगा ऐसा
पानी की बूंदें हैं
सलीके से बह जाने दो
अब नहीं है कोई ख्वाब
हर आरजू में तुमको देखा
निगाहों को नहीं अब
किसी अपनों की तलाश
मोहब्बत ने छोड़ा हाथ
गमों ने अपनाया साथ
अल्फाजों को चुनती हूं
दर्द-ए-बयां के लिए
काश ये न कहना पड़े
न तुम आते
न प्यार होता
इन आंखों को कभी
तेरा  न इंतजार होता ।

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

जिंदगी के सफर में

( मैं आज कुछ चीजों को लेकर परेशान हूं...किसी भी चीज में मन नहीं कर रहा है...तो सोचा मेरे दिल का बोझ कुछ हल्का कर लूं )

जिंदगी के सफर में
कुछ राहें हैं अनजान
डर लगता है
कहीं कुछ हो न जाए
सफर तो तय करना है
चाहे जो कुछ भी हो अंजाम
मंजिल है मेरी
इस रास्ते के अंतिम मोड़ पर
लिया खुदा का नाम
और निकल पड़े
अजनबी डगर  पर
चाहे जो कुछ भी हो अंजाम
सुनसान सड़क पर
मेरे सिवा सिर्फ थी मेरी परछाई
पर हिम्मत न खोई मैंने
लिया खुदा का नाम
चाहे जो कुछ भी हो अंजाम.....

(अभी ये सफर अधूरा है..जब पूरा हो जाए.. तब अंजाम के बारे में लिखूंगी )

गुरुवार, 29 मार्च 2012

तुम्हारी अदा

(अनुराग जिसे प्यार से मैं अनु कहती हूं... मेरे से रूठ गया है...कोशिश कर रही हूं ..लेकिन अभी तक उसे मना नहीं पाई हूं....अभी भी वो मेरे सामने बैठा है पर बातचीत बंद है..उसी दोस्ती पर)

तुम्हारे रूठने की हर अदा
भाती है मुझे
तुम चाहे लाख छुपा लो
तुम्हारे छुपने की अदा
भाती है मुझे
चाहे कोशिश कर लो जितनी
मुझसे दूर जाने की
तुम्हारे दूर जाने की अदा
भाती है मुझे
मेरी छोटी सी खता की
न दो इतनी बड़ी सजा
मेरे पास आने की अदा
भाती है मुझे
बस माफ कर दो एक बार 'अनु'
तुम्हारे मुस्कुराने की अदा
भाती है मुझे ।

अब तो हमेशा ही बात होगी

(रवि...यही नाम है उनका, लेकिन हम उन्हें रवि दा के नाम से बुलाते हैं, जिंदगी की इस भीड़ में अचानक हमारी मुलाकात हुई, लेकिन एक पल के लिए भी ये नहीं लगा कि ये रिश्ता नया है, बल्कि इस रिश्ते में एक अपनापन महसूस हुआ, बस उसी रिश्ते के नाम।)

जिंदगी की भीड़ में
उनसे यूं मुलाकात हुई
पल भर के लिए लगा
ठहर गई रात
अब तो फिर कभी नहीं बात होगी

वक्त के घरौंदों में मशगूल
हम बेफिक्र हो कर चल दिए
लेकिन कसक तो थी
ठहर गई रात
अब तो फिर कभी नहीं बात होगी

रिशतों की दुनिया में
हमारी किस्मत थी मेहरबां
सोचा न था मिल गए आप
ठहर गई रात
लेकिन अब तो हमेशा ही बात होगी

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

जिंदगी यूं ही जीते चले जाएंगे

तुमसे कहने की कई बार कोशिश की थी मैंने
पर तुमने कोशिश ही नहीं की समझने की
जताना चाहती थी
चाहती थी एहसास दिलाना
पर तुम मेरे साथ नहीं थे
पास होकर भी थे कोसो दूर
मुझे खुद पर रोना आया
हालात को भी दो चार सुनाया
पर वो वक्त शायद मेरी किस्मत में नहीं
चलो ये वक्त भी गुजार लिए
वो वक्त भी बिता दिए
जिंदगी यूं ही जीते चले जाएंगे
 

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

ये दिल बेचारा

कुछ कहा नहीं जाता
कुछ सहा नहीं जाता
क्या करे दिल ये बेचारा
तुम बिन जिया नहीं जाता
दिल ही ने दूर किया
अब दिल ने ही मजबूर किया
हर फिक्र को छोड़
हर फर्क को मिटाकर
ये प्यार बस तुम्हारे पास जाना चाहता !

बुधवार, 25 जनवरी 2012

यादों से प्यार

(बस दिल किया कि प्यार के नाम दो लाइन लिखूं तो लिख दिया)

दिल के रंगीन पन्नों पर लिखा मैंने तेरा नाम
तुमने तो लिखा था कोरे कागज पर मेरा नाम
फिक्र नहीं की मिट गई वो कागज पर की स्याही
फिक्र है दिल पर लिखे नाम को मिटाऊं कैसे
नाराज नहीं तुमसे कि तुम मुझसे दूर चले गए
नाराज हूं खुदसे तुमसे दूर होकर भी करीब हूं तुझसे
नाता नहीं तुम्हें मेरे प्यार से
पर नाता है मेरा तेरे प्यार से
कभी करती थी तुम्हारे प्यार पर राज
आज करती हूं तुम्हारी यादों से प्यार।

शनिवार, 21 जनवरी 2012

प्यार का साया

( आज अपनी दोस्त सब्बी के साथ किताबों के उन्न पन्नों को खोला जो मैंने बंद कर रखा है)


दिल के समंदर में
वो यादों की लहर
फिर खा रही हैं हिचकोले,
न दूर तक का कोई किनारा
और न ही हवा के रूख का कोई सहारा
न जाने तेरी य़ाद ने क्यों ली अंगड़ाई
जिंदगी की लड़ी थोड़ी सी डगमगाई
काश किस्मत को वो प्यार गंवारा होता
इस दिल को किसी और का सहारा न होता
जिंदगी पर वक्त का साथ होता
हमारे साथ अपने प्यार का साया होता
इकरार है हमें नहीं है कोई इंकार
आज भी है प्यार का साया हमपर
पर हम बन गए हैं किसी और के प्यार के साय़े।

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

हमने तुमको याद किया .....

(कहते हैं जब दो दिल का मिलना हो तो इत्तफाक ही सही मिलते जरूर हैं.....कभी किसी को दिल से याद करो और उसी दरम्यान याद आने वाला शख्स तुम्हें याद करे तो ........)

तुम्हारी यादों से निकल कर
कुछ दूर तलक चले ही थे हम
और तुम्हारी परछाई ने
फिर वापस आने को मजबूर किया
तुम्हें भूलकर दो कदम निकले ही थे हम
और फिर हमारे दिल ने लौटने पर मजबूर किया.........................

सोमवार, 23 अगस्त 2010

दिल को कैसे समझाएं.....

( किसी को भूलना जिससे आप बहुत प्यार करते हो...लेकिन कभी कभी जिंदगी ऐसी करवट लेती है कि आपको मजबूर होकर भूलाना पड़े तो कितना मुश्किल है....)

दिल को कैसे मनाएं
दिल को कैसे समझाएं
तेरी याद जाती नहीं
तेरा प्यार हटता ही नहीं
तुम्हें भूल पाना अब हमारे बस में नहीं.......

तुम कहते हो भूल जाऊं तुम्हें
पर तुम चाहते नहीं मैं भूला दूं तुम्हें
तुम कहते दूर हो जाऊं तुझसे
पर तुम चाहते नहीं दूर हो जाऊं तुमसे
न जाने ये कैसी कसमकश है
जब दिल चाहता कुछ औऱ है
पर करना पड़ता कुछ औऱ है...........


दिल को क्या बताएं
दिल को क्या सुनाएं
ये दिल तो दिल के हाथों खुद मजबूर है
जो कहता है मुझसे
तुम्हें भूल पाना अब हमारे बस में नहीं है....

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

न जाने कहां चले गए थे हम

कहां चले गए थे हम
एहसासों की दुनिया से दूर
जिंदगी की हकीकत को
जानने की कोशिश में
भटक गए थे कहीं दूर
हां हमें खुद भी नहीं पता
कहां चले गए थे हम

कागज और कलम से नाता तोड़
एहसास और जज्बात को छोड़
कोई ख्वाब नहीं, और न कोई ख्वाहिश
बगैर आप सभों का साथ
चले थे जिंदगी को जीने
पता नहीं कहां चले गए थे हम

रास न आई आपके बगैर ये जिंदगी
फिर से आ लौटे
हम सबकी दुनिया में
फिर होंगे खटटे मीठे एहसास
तो दिल के कोने में दबे दर्द का इकबाल ए बयां
हां हम लौट आए हैं
उसी गुमनाम गली में
जहां गुमनाम होकर भी
एक अपनी पहचान है।

(हम बहुत दिनों तक आप सभी से दूर रहे....याद तो आई आप सबकी ...पर वक्त न दे पाने के गुनहगार हैं ...हम...बस बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से मुलाकात पर ये दिल के एहसास......)

रविवार, 24 जनवरी 2010

अच्छा लगता है मुझको...

(कभी कभी जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो हमें अच्छी लगती है बस उसी पर ये नजराना)

तेरा पास आना
पास आकर के गुजर जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा नजर मिलाना
नजरें मिलाके नजर चुरा जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा मुस्कुराना
मुस्कुराके चले जाना
अच्छा लगता है मुझको ।
तेरा दूर जाना
दूर जाके प्यार अपना जताना
अच्छा लगता है मुझको ।
तुम्हें बहुत कुछ है अभी बताना
कुछ नहीं बता के आंखों से कह देना
अच्छा लगता है मुझको ।
तुम्हारा मेरा कोई न होना
कुछ न होकर भी बहुत कुछ होना
अच्छा लगता है मुझको।
बस अब और क्या कहूं
सब बातों को सोचके
सोचकर वक़्त बिताना
अच्छा लगता है मुझको।

इस रिश्ते को क्या नाम दूं ?

(कुछ रिश्तों को लेकर अनजान हूं मैं, समझ नहीं आता रिश्तों से जुड़े हर डोर को किस किस नामसे पुकारुं, कभी कभी ऐसा होता है कुछ लोग बनने वाले हर रिश्ते से भी ज्यादा ओहदे के होते हैं तो कुछ मिले रिश्तों के नाम से भी कम की अहमियत रखते हैं, और कुछ तो ऐसे होते हैं जिन्हे रिश्तों की डोर में बांधना मुश्किल हो जाता है और तब जब रिश्ता का नाम समझ में न आए।)

एक किताब है मेरी जिंदगी
जिसमें हैं प्यार के दो लब्ज
नहीं पता मुझे,उन लब्जों को
रिश्तों का कौन सा नाम दूं
एक कहानी की शुरुआत है
तो दूसरा कहानी का अंत
लेकिन जिसने पिरोया है
उन शब्दों से बनती है
एक अनजान परिभाषा
दिल को समझाया कई बार
जिंदगी एक अक्षर पर शुरु नहीं
और न ही एक अक्षर पर खत्म
ये तो एक पूरी किताब है
जिसपर है कई शब्दों का मेल
तो जगह जगह पर लफ्जों का खेल
दिल तो कहता है हमसे बार बार
भावनाओं की दरिया में मत बह
वरना जिंदगी की हर हकीकत से बेखबर
डूब जाएगी तेरी कश्ती
थाम ले तू सच्चाई को
जान ले तू हर डोर को
हर रुख का सामना कर
अपने मन की माना कर
इसे ही तो कहते हैं रिश्तों की दुनिया
जो शुरु कहीं से होती है
तो खत्म कहीं और पर।

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

कमबख्त ये आंसू

(हर कोई मुझसे कहता कि मैं बहुत कमजोर हूं। दिल को दुखाने वाली हर छोटी छोटी बातों को लेकर रो पड़ती हूं। मेरे दिल के करीब रहनेवाले सभी यही कहते कि मैं बेवकूफ हूं जो हर किसी के लिए आंसू बहाती हूं। उनका कहना है कि मुझे उनके लिए आंसू बहाना चाहिए जो मेरे अपने हों । लेकिन मैं ये कैसे साबित करुं कि चाहे कोई वो मेरे अपने हों या पराए जब भी मेरा दिल दुखता है तो आंसू अपने आप झरने लगते हैं जिनको चाहकर भी मैं रोक नहीं पाती।)

कौन कहता है कि रोना हमें पसंद है
हां हमें रोना पसंद है, पर ये आंसू नहीं
लेकिन कमबख्त नालायक आंसू
हर छोटी छोटी बातों का संदेशा ले आती
मेरे मासूम से चेहरे को और भी दर्द दे जाती
ये बेमतलबी आंसू हर जगह मुझे कमजोर बनाते हैं
लोगों को बोलने का मौका मिल जाता
रोनेवाली बात ही नहीं फिर तुम रोती क्यों हो
अब मैं हर किसी को कैसे समझाऊं
दर्द देनेवाली हर छोटी बात
मेरे लिए एक बड़ी बात है
जो मेरे जेहन से होकर दिल को छूती है
और दुख के दरिया में आंसूओं का सागर
मेरे चेहरे पर आ मिलता है......

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

समझना अभी भी बाकी है....

ऐसा लगता है मुझे
समझ न सके हैं दुनिया को अबतक
क्योंकि हंसते हंसते रोने लगते हैं
तो कभी रोते रोते हंस पड़ते

नहीं पता कि कौन कब दगा दे जाए
सफर में साथ चल रहा है कोई आपके साथ
पराया हो या हो अपना
पता नहीं कब हाथ छोड़ जाए

साथ बैठकर बातें हो रही है
और अचानक झगड़ा हो जाए
जहां सजी थी महफिल
पता नहीं कब जंग का मैदान बन जाए

अच्छे खासे मुस्कुरा रहे हैं
और कोई आपको दो बात कह जाए
फूट पड़ता गुस्सा और निकल पड़ती है गाली
कौन दोस्त कौन दुशमन पता ही नहीं चलता

शायद इसी को इसीलिए कहते हैं जिन्दगी
जहां तुम कुछ समझ सको ,जहां कुछ समझा सको
तो कभी सवालों में उलझ जाओ
तो कभी जवाबों में ही उलझ जाओ